₹35 लाख की बैंकिंग ठगी: ICICI बैंक के कर्मचारियों ने ही ग्राहकों को लगाया चूना, फर्जी FD–म्यूचुअल फंड से खेल
देश के बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा करने वाले ग्राहकों के लिए यह खबर चौंकाने वाली है। निजी क्षेत्र के बड़े बैंक ICICI बैंक से जुड़ा एक गंभीर घोटाला सामने आया है, जिसमें बैंक के ही कर्मचारियों ने ग्राहकों के भरोसे को धोखे में बदल दिया। कोलकाता में सामने आए इस मामले में करीब ₹34.75 लाख की ठगी का खुलासा हुआ है और तीन बैंक कर्मचारी गिरफ्तार किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने खुद को भरोसेमंद बैंक अधिकारी बताकर ग्राहकों को फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और म्यूचुअल फंड निवेश के नाम पर ठगा। ग्राहकों को ऐसे दस्तावेज़ दिए गए, जो देखने में पूरी तरह असली लगते थे—बैंक की मुहर, फॉर्मेट और साइन तक सब कुछ असली जैसा। लेकिन हकीकत में ये कागज़ महज़ छलावा थे।
जांच में सामने आया है कि आरोपी ग्राहकों से नकद और ट्रांसफर के जरिए रकम लेते थे और उसे बैंक के आधिकारिक सिस्टम में दर्ज किए बिना निजी खातों में डायवर्ट कर देते थे। ग्राहक जब तक ब्याज या मैच्योरिटी की उम्मीद करते, तब तक ठगी का खेल पूरा हो चुका होता।
इस मामले में जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, वे बैंक से जुड़े कर्मचारी बताए जा रहे हैं। पुलिस ने इनके पास से कई फर्जी निवेश प्रमाण पत्र, दस्तावेज़, मोबाइल फोन और लेन-देन से जुड़े सबूत बरामद किए हैं। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह ठगी एक-दो लोगों तक सीमित नहीं हो सकती और इसमें और पीड़ित सामने आ सकते हैं।
यह घोटाला सिर्फ आर्थिक नुकसान की कहानी नहीं है, बल्कि कॉरपोरेट गवर्नेंस और आंतरिक निगरानी प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। सवाल यह भी है कि आखिर बैंक के भीतर रहते हुए कर्मचारी इतने लंबे समय तक इस तरह की ठगी कैसे करते रहे और बैंक की ऑडिट या मॉनिटरिंग व्यवस्था को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राहकों को अब पहले से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी FD या निवेश में पैसा लगाने से पहले यह सुनिश्चित करें कि
निवेश बैंक के कोर सिस्टम में दर्ज हुआ है या नहीं
आधिकारिक रसीद और अकाउंट स्टेटमेंट तुरंत प्राप्त हो
केवल व्यक्तिगत भरोसे के बजाय डिजिटल वेरिफिकेशन पर ज़ोर दें
फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और बैंक प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। यह मामला एक कड़वी सच्चाई उजागर करता है—जब भरोसे के रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो नुकसान सिर्फ पैसों का नहीं, सिस्टम की साख का भी होता है।

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