Kunal Shah की बेबाक राय: भारत में समय, पैसा और महिलाओं की भूमिका
CRED के संस्थापक Kunal Shah ने कहा कि भारत में लोग थोड़ा पैसा बचाने के लिए बहुत सारा समय बर्बाद कर देते हैं। उन्होंने Forbes India को दिए इंटरव्यू में बताया कि कैसे भारतीयों को अपने समय की सही कीमत का अंदाजा नहीं होता।
“अमेरिका में किशोरों को भी पता होता है कि उनका एक घंटे का क्या मूल्य है — चाहे वो लॉन काट रहे हों या वेटर का काम कर रहे हों। लेकिन भारत में ₹10,000 प्रति घंटे कमाने वाला व्यक्ति भी ₹500 की बचत के लिए एक घंटा बर्बाद कर देता है। ये समय का गलत गणित है।”
Kunal Shah के अनुसार, भारत में ज़्यादातर लोग Time is Money के कॉन्सेप्ट को नहीं समझते।
“Dots Connect करना ही मेरी ताकत है”
उन्होंने कहा कि उनके सभी बिज़नेस उनके जीवन के अनुभवों और ऑब्ज़र्वेशन से बने हैं — चाहे वो BPO हो, मार्केटिंग सॉल्यूशन हो या FreeCharge (जिसे उन्होंने $400 मिलियन में बेचा)।
चीन में एक अनोखा अनुभव
FreeCharge के बाद चीन की यात्रा के दौरान उन्होंने एक दिलचस्प चीज़ देखी — हर प्रोडक्ट मीटिंग में पुरुषों से ज्यादा महिलाएं थीं।
“ये देखकर मैंने भारत में महिलाओं की वर्कफोर्स भागीदारी को जांचा — और नतीजे चौंकाने वाले थे। महिला श्रम भागीदारी बहुत ही कम थी।”
महिलाओं की भागीदारी और भारत की अर्थव्यवस्था
Kunal Shah का मानना है कि अगर केवल एक जेंडर की कमाई पर देश चलेगा, तो Per Capita Income कभी नहीं बढ़ेगी।
- कम महिला भागीदारी से आर्थिक विकास धीमा होता है।
- इससे समाज में असंतुलन पैदा होता है।
- जिन देशों में महिलाओं की आर्थिक आज़ादी कम होती है, वहां तलाक की दर भी कम होती है — जो जरूरी नहीं कि खुशहाल विवाह का संकेत हो।
निष्कर्ष: समय की कीमत समझना और महिला भागीदारी को बढ़ावा देना, किसी भी देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।

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