अब नहीं होंगे बैकबेंचर: केरल के स्कूलों में नई बैठने की व्यवस्था
मलयालम फिल्म स्थनार्थी श्रीकुट्टन के एक सीन ने केरल के कुछ स्कूलों में बड़ा बदलाव ला दिया है। निर्देशक विनेश विश्वनाथ की यह फिल्म अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
फिल्म में दिखाई गई नई सर्कुलर बैठने की व्यवस्था को केरल के कई सरकारी स्कूलों ने अपनाना शुरू कर दिया है। यह कदम छात्रों को "फ्रंटबेंचर" और "बैकबेंचर" की सोच से बाहर लाने की दिशा में है।
राज्य के 9,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में यह बदलाव हो रहा है, जिससे 20 लाख से ज़्यादा छात्रों को लाभ मिलेगा। इसका उद्देश्य है—सीखने का माहौल और भी समावेशी और संवादात्मक बनाना।
यह पहल शिक्षा में नवाचार के प्रति केरल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नई व्यवस्था से छात्रों की एकाग्रता बढ़ेगी, उनकी भागीदारी अधिक होगी और कक्षा में समानता को बढ़ावा मिलेगा।
पारंपरिक बैकबेंच संस्कृति को भले कुछ लोग मिस करें, लेकिन यह नया प्रयोग शिक्षा के अनुभव को बेहतर और आधुनिक बनाने में मदद करेगा। यह एक अस्थायी त्योहार जैसी व्यवस्था नहीं, बल्कि शिक्षा में स्थायी सुधार है।
क्या यह बदलाव छात्रों को ज्यादा बेहतर तरीके से सीखने में मदद करेगा? आप इस पर क्या सोचते हैं?

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