भारत बना दुनिया का चौथा सबसे समान देश: वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट
नई दिल्ली, जुलाई 2025: विश्व बैंक द्वारा जारी एक नई वैश्विक असमानता रिपोर्ट में भारत को चौथे स्थान पर रखा गया है, जो समानता के स्तर के मामले में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह रिपोर्ट दुनिया भर के देशों में आय, संपत्ति, शिक्षा और अवसरों की समानता के आधार पर बनाई गई है।
- भारत को समानता सूचकांक में 4वां स्थान मिला
- शीर्ष 3 देश: फिनलैंड, नॉर्वे, जापान
- रिपोर्ट में कुल 170 देशों का मूल्यांकन किया गया
रिपोर्ट में क्या कहा गया?
वर्ल्ड बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में नीतिगत सुधार, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, और शिक्षा एवं स्वास्थ्य तक बेहतर पहुंच जैसे क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है। खासकर ग्रामीण भारत में डिजिटल पहुंच, महिला सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन के कारण असमानता में भारी गिरावट आई है।
समानता का मूल्यांकन किन आधारों पर?
रिपोर्ट में निम्नलिखित पाँच प्रमुख मानकों के आधार पर देशों की रैंकिंग की गई:
- आय की समानता
- शिक्षा तक समान पहुंच
- स्वास्थ्य सेवाओं की समान उपलब्धता
- नौकरी और रोजगार के अवसर
- जेंडर इक्वालिटी (लैंगिक समानता)
भारत की सफलता के पीछे कारण
कुछ प्रमुख योजनाएं और नीतियां जिन्होंने भारत को इस मुकाम तक पहुँचाया:
- जन धन योजना: करोड़ों लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया
- आयुष्मान भारत: गरीबों को स्वास्थ्य बीमा की सुविधा
- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा
- PM किसान सम्मान निधि: किसानों की आर्थिक मदद
- डिजिटल इंडिया: सेवा और सूचना तक आसान पहुँच
क्या कहता है आंकड़ा?
रिपोर्ट के अनुसार:
- भारत में पिछले 10 वर्षों में गरीबी दर 22.5% से घटकर 9.1% हो गई
- ग्रामीण-शहरी आय अंतर में 37% की कमी आई
- महिलाओं की शिक्षा दर 68% से बढ़कर 81% हो गई
निष्कर्ष
भारत का चौथे सबसे समान देश के रूप में स्थान प्राप्त करना केवल आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि जब नीति, नीयत और निष्पादन सही हो, तो सामाजिक बदलाव संभव है। यह उपलब्धि न केवल गर्व की बात है, बल्कि भविष्य के लिए एक प्रेरणा भी है कि समानता की ओर भारत का सफर और भी मजबूत हो।
Sources: World Bank Equality Index Report 2025, Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI), NITI Aayog Data

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