"कैशबैक का गणित: फिनटेक कंपनियां आपको रिवार्ड कैसे दे रही हैं?"

कैशबैक डेबिट कार्ड्स का रहस्य

कैशबैक डेबिट कार्ड्स का रहस्य: कंपनियां कैसे देती हैं आपको रिवार्ड?

आजकल कई फिनटेक ऐप्स हर डेबिट कार्ड स्वाइप पर 1% कैशबैक दे रही हैं — बिना किसी सालाना फीस या क्रेडिट की जरूरत के। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कंपनियां इस कैशबैक को कैसे वहन करती हैं?

1️⃣ इंटरचेंज फीस: जब आप कुछ खरीदते हैं, तो कंपनी को मर्चेंट से लगभग 0.5% कमीशन मिलता है। यानी ₹100 खर्च करने पर उन्हें ₹0.50 मिलते हैं। हालांकि ये रकम 1% कैशबैक देने के लिए पूरी नहीं होती।
2️⃣ जमा पर ब्याज: जब आप अपने सेविंग्स अकाउंट में पैसा रखते हैं, तो फिनटेक कंपनियां उस पर बैंकों से ब्याज कमाती हैं। इसका एक हिस्सा उनके पास आता है।
3️⃣ फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की बिक्री: जब आप इनके प्लेटफॉर्म पर फिक्स्ड डिपॉजिट, बीमा, म्यूचुअल फंड या डिजिटल गोल्ड में निवेश करते हैं, तो इन्हें उस पर छोटा कमीशन मिलता है।
4️⃣ लोन और क्रेडिट कार्ड्स: यही सबसे बड़ा कमाई का जरिया है। जब आप कंपनी पर भरोसा करते हैं, तो ये आपको पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड ऑफर करते हैं, जिस पर इन्हें ज्यादा ब्याज और फीस मिलती है। इससे कैशबैक की लागत वसूल हो जाती है।
5️⃣ वेंचर कैपिटल और लॉन्ग टर्म सोच: कई कंपनियां फिलहाल घाटे में काम कर रही हैं, लेकिन उनका उद्देश्य है यूजर्स को जोड़कर भविष्य में मुनाफा कमाना। वो ₹100 अभी आप पर खर्च करती हैं, उम्मीद में कि भविष्य में आपसे ₹1,000 कमाएंगी।

निष्कर्ष: कैशबैक असली है, लेकिन यह कोई जादू नहीं — यह एक रणनीतिक निवेश है ताकि आप लंबे समय तक उनके ग्राहक बने रहें।

इन बेनिफिट्स का आनंद लें, लेकिन समझें कि ये किसी बड़ी बिज़नेस स्ट्रैटेजी का हिस्सा हैं। जब भी कोई फ्री रिवॉर्ड मिले, याद रखें — कोई न कोई इसका खर्च उठा रहा है।

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