भारत बंद: 9 जुलाई 2025 - असर, आंकड़े और आम जनता की पीड़ा
9 जुलाई 2025 को देशभर में भारत बंद का व्यापक असर देखा गया। यह बंद मुख्यतः केंद्र सरकार की नई ‘राष्ट्रीय कृषि नीति 2025’ और डीजल-पेट्रोल मूल्य वृद्धि के विरोध में आयोजित किया गया। बंद को विभिन्न किसान संगठनों, विपक्षी राजनीतिक दलों और ट्रांसपोर्ट यूनियनों का समर्थन मिला।
मुख्य कारण:
- नई कृषि नीति में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी न होना।
- डीजल और पेट्रोल की कीमतों में औसतन ₹6.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी।
- ट्रांसपोर्ट टैक्स और टोल दरों में वृद्धि।
बंद का व्यापक असर:
- देश के 18 राज्यों में आंशिक या पूर्ण बंद रहा।
- रेलवे की 245 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, 97 ट्रेनों को डायवर्ट किया गया।
- सड़क परिवहन 60% तक प्रभावित हुआ, खासकर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में।
- दिल्ली NCR में मेट्रो स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ाई गई और 12 स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद किया गया।
- 300 से अधिक छोटे व्यवसाय और बाजार बंद रहे।
आम जनता पर प्रभाव:
श्रमिकों, छात्रों, अस्पताल जाने वाले मरीजों और ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा।
- 100 से अधिक जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद रहे।
- आपातकालीन सेवाएं प्रभावित नहीं की गईं, परंतु एम्बुलेंस को ट्रैफिक में कई जगह रोका गया।
- दैनिक मजदूरी पर काम करने वालों को उस दिन कोई आमदनी नहीं हो सकी।
सरकार की प्रतिक्रिया:
केंद्र सरकार ने बंद को "राजनीति से प्रेरित" बताया और कहा कि "असहमति के लोकतांत्रिक माध्यम होने चाहिए, न कि जनजीवन को बाधित करने वाले।"
निष्कर्ष:
भारत बंद 9 जुलाई 2025 को लोगों की असहमति की एक बड़ी आवाज़ के रूप में देखा गया। हालांकि इसके कारण सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया, लेकिन इससे यह संदेश जरूर गया कि जनसुनवाई की जरूरत है।
सावधानी: सरकार को आने वाले दिनों में इस असंतोष को गंभीरता से लेते हुए संवाद स्थापित करना होगा ताकि लोकतंत्र मजबूत रह सके।

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