✅ बैंकिंग इंडस्ट्री कैसे काम करती है?
बैंक एक वित्तीय मध्यस्थ (Financial Intermediary) की तरह काम करते हैं — वे उन लोगों से पैसे लेते हैं जिनके पास फंड होता है (जमा कर्ता) और उन्हें उन लोगों को देते हैं जिन्हें पैसे की ज़रूरत होती है (उधार लेने वाले)।
🔍 बैंक क्या-क्या करते हैं?
- डिपॉज़िट (Deposits) लेते हैं
- लोन (Loans) देते हैं
- लेन-देन की सुविधा प्रदान करते हैं
- अन्य वित्तीय सेवाएं देते हैं
बैंक अपने रेवेन्यू का ज़्यादातर हिस्सा लोन पर ब्याज से, सर्विस फीस से और अन्य वित्तीय सेवाओं से कमाते हैं।
📌 मुख्य बातें:
1️⃣ डिपॉज़िट और लोन:
डिपॉज़िट: बैंक ग्राहकों से पैसा लेते हैं जैसे सेविंग अकाउंट या करंट अकाउंट में।लोन: ये जमा की गई राशि अन्य ग्राहकों को लोन के रूप में दी जाती है।
ब्याज: बैंक डिपॉज़िट पर थोड़ा ब्याज देते हैं और लोन पर ज़्यादा ब्याज लेकर लाभ कमाते हैं।
2️⃣ बैंकिंग सेवाएं:
- लेन-देन की सुविधा: डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग
- निवेश सेवाएं: शेयर, बॉन्ड और म्यूचुअल फंड
- अन्य सेवाएं: करेंसी एक्सचेंज, फॉरेक्स ट्रेडिंग, वेल्थ मैनेजमेंट
3️⃣ बैंक पैसे कैसे कमाते हैं?
- ब्याज आय: लोन और निवेश पर मिलने वाला ब्याज
- फीस: अकाउंट मेंटेनेंस, ट्रांजैक्शन, लोन एप्लिकेशन आदि
- अन्य कमाई: क्रेडिट कार्ड इंटरचेंज फीस, एडवाइजरी सर्विसेस
🔥 बैंकिंग इंडस्ट्री के 4 जरूरी फैक्टर्स:
1️⃣ CRR (कैश रिज़र्व रेश्यो)
बैंक को RBI के पास एक निश्चित राशि जमा करनी होती है। ज्यादा CRR का मतलब है, लोन देने के लिए कम पैसा।
2️⃣ SLR (स्टैच्यूटरी लिक्विडिटी रेश्यो)
बैंक को कुछ पैसा कैश, गोल्ड या सरकारी बॉन्ड में रखना होता है। SLR बढ़ने से भी लोन देने की क्षमता घटती है।
3️⃣ रिवर्स रेपो रेट
इस रेट पर RBI बैंकों से पैसे उधार लेता है। जब रिवर्स रेपो रेट बढ़ता है, तो बैंक ज्यादा पैसा RBI के पास जमा कराते हैं और कम लोन देते हैं।
📈 आर्थिक विकास और वित्तीय स्थिरता
- बैंक निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को फाइनेंस कर के आर्थिक विकास में योगदान देते हैं।
- RBI द्वारा रेगुलेट होने के कारण बैंक वित्तीय स्थिरता बनाए रखते हैं और डिपॉज़िटर्स का पैसा सुरक्षित रहता है।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें