अंतिम सुराग (The Final Clue)

🕵️‍♂️ अंतिम सुराग (The Final Clue)

अध्याय 1: एक लाश और एक झूठ

28 नवंबर की रात थी। दिल्ली के करोल बाग इलाके में अचानक एक फ्लैट से तेज़ चीख सुनाई दी। पुलिस जब पहुँची, तो दरवाज़ा अंदर से बंद था। कमरे के अंदर, एक व्यक्ति की लाश पड़ी थी — नाम था राजीव मित्तल, एक प्रसिद्ध बिज़नेसमैन।

कोई भी अंदर आया कैसे? और अगर ये आत्महत्या थी, तो बंद कमरे में किसी तीसरे व्यक्ति की परछाई CCTV में कैसे दिखी?

अध्याय 2: पत्रकार या जासूस?

आदित्य वर्मा — एक स्थानीय अखबार में काम करने वाला रिपोर्टर। वह राजीव केस को केवल एक और खबर की तरह कवर करने गया था, पर जैसे ही उसने केस फाइल देखी, एक नाम उसकी आंखों में चुभ गया: मोहिनी शर्मा — राजीव की पर्सनल असिस्टेंट, और आदित्य की कॉलेज क्रश।

आदित्य को लगा कि कुछ गड़बड़ है। पुलिस ने केस को आत्महत्या करार दे दिया था, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं था। उसने खुद छानबीन शुरू की।

अध्याय 3: पहला सुराग

राजीव के घर में एक पेंटिंग मिली थी, जिसमें लाल रंग से कुछ शब्द छिपे हुए थे:
"305 - P, रहस्य यहाँ छिपा है"

यह एक पुराने होटल पैलेस इन का कमरा नंबर था। वहां पहुँचने पर उसे एक बंद लॉकर मिला — और उसके अंदर था एक पुराना पेन ड्राइव।

पेन ड्राइव में कई कंपनियों के दस्तावेज़ थे — मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी अकाउंट्स और एक नाम जो सबसे ऊपर था: आर. त्रिपाठी — दिल्ली का बड़ा नेता।

अध्याय 4: पीछा और धोखा

आदित्य अब निशाने पर था। एक रात, उसकी गाड़ी के ब्रेक फेल कर दिए गए। किसी ने उसका फ़ोन हैक कर लिया था। लेकिन इससे पहले कि वह हार मानता, उसे मोहिनी का एक कॉल आया।

“मुझे सच पता है,” उसने कहा, “पर हमें जल्दी मिलना होगा। कोई मेरा पीछा कर रहा है।”

मोहिनी ने बताया कि राजीव उस नेता के लिए पैसों की हेराफेरी करता था। लेकिन अब उसका जमीर जाग चुका था।

अध्याय 5: अंतिम सुराग

एक फोटोग्राफर से CCTV फुटेज मिला — राजीव के घर में एक नकाबपोश आदमी जाता दिखा। लेकिन उसकी चाल... बिलकुल जानी-पहचानी थी।

वह कोई और नहीं, डीसीपी आर. भाटिया था — वही पुलिस अफसर जिसने केस को आत्महत्या बताया था।

अध्याय 6: न्याय या मौत?

आदित्य ने सबूत लेकर लाइव रिपोर्ट करने का प्लान बनाया। लेकिन रिपोर्टिंग से पहले ही धमाका हुआ। कैमरा बंद, नेटवर्क डाउन।

अगले दिन दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर एक बैग मिला — उसमें एक हार्ड ड्राइव, एक चिट्ठी और एक नाम:

"अगर मैं मारा गया, तो यह सच दुनिया तक पहुँचे - आदित्य वर्मा"

सभी सबूत मीडिया में लीक हुए, आर. त्रिपाठी गिरफ्तार हुआ, और डीसीपी भाटिया को निलंबित कर दिया गया।

लेकिन आदित्य... कहीं नहीं मिला।


🔍 क्या आदित्य मारा गया? या वह अब किसी और रहस्य के पीछे है?

कभी-कभी सच्चाई जानने की कीमत, ज़िंदगी होती है।


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