दुनिया में अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ
वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अमेरिका का टैरिफ नीति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। टैरिफ का अर्थ है किसी देश द्वारा आयातित वस्तुओं पर लगाया गया कर। अमेरिका ने वर्षों से विभिन्न देशों पर टैरिफ लागू किए हैं – कुछ राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से, तो कुछ घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने के लिए।
प्रमुख टैरिफ युद्ध: अमेरिका बनाम चीन
2018 में अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ युद्ध शुरू हुआ जब तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन से आयातित 250 अरब डॉलर से अधिक की वस्तुओं पर टैरिफ लगाया। इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाया।
भारत और अन्य देशों पर प्रभाव
अमेरिका ने भारत पर भी टैरिफ बढ़ाए हैं, विशेषकर स्टील (25%) और एल्युमीनियम (10%) पर। इससे भारत की निर्यात नीतियों पर असर पड़ा और द्विपक्षीय व्यापार वार्ताएं तेज़ हुईं। यूरोपीय संघ, कनाडा, और मैक्सिको पर भी इसी प्रकार के टैरिफ लगाए गए।
कुल द्विपक्षीय व्यापार – $128 अरब
अमेरिका को भारत का निर्यात – $78 अरब
अमेरिका से भारत का आयात – $50 अरब
अमेरिकी टैरिफ का उद्देश्य
- घरेलू उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा
- राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत संवेदनशील उत्पादों को नियंत्रण में रखना
- व्यापार घाटा कम करना
- अनुचित व्यापार प्रथाओं का विरोध करना
टैरिफ का विश्व पर प्रभाव
अमेरिका की टैरिफ नीतियों ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। यह उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ाने का कारण बना है और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता पैदा हुई है। साथ ही, कई देश अब द्विपक्षीय या क्षेत्रीय व्यापार समझौतों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
निष्कर्ष
अमेरिका की टैरिफ नीति सिर्फ व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक कदम भी है। हालांकि यह अल्पकालिक लाभ दे सकती है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह वैश्विक साझेदारियों को चुनौती देती है। ऐसे में संतुलित और संवादपूर्ण नीति की आवश्यकता है जो व्यापार और कूटनीति दोनों के हित में हो।

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