भारत में ऑफिस अफेयर्स की अचानक बढ़ोतरी: जानिए इसके पीछे के कारण और प्रभाव

भारत में ऑफिस अफेयर्स की अचानक बढ़ोतरी: तथ्य, आंकड़े और प्रभाव

भारत में ऑफिस अफेयर्स की अचानक बढ़ोतरी: तथ्य, आंकड़े और प्रभाव

पिछले कुछ वर्षों में भारत में ऑफिस अफेयर्स (कार्यस्थल पर रोमांटिक संबंध) की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है। यह न केवल सामाजिक दृष्टिकोण से चर्चा का विषय बन चुका है, बल्कि कंपनियों की एचआर नीतियों को भी प्रभावित कर रहा है।

क्या कहते हैं आंकड़े?

  • एक 2023 के सर्वेक्षण के अनुसार, 42% पेशेवरों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने सहकर्मी के साथ रोमांटिक संबंध बनाए हैं।
  • महिलाओं में यह आंकड़ा 28% और पुरुषों में 47% तक पहुँच चुका है।
  • मेट्रो शहरों में, विशेष रूप से बेंगलुरु, मुंबई और गुरुग्राम में यह प्रवृत्ति अधिक देखी जा रही है।

कारण क्या हैं?

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऑफिस अफेयर्स के बढ़ने के पीछे कई कारण हैं:

  1. लंबे कार्य घंटे: लोग दिन का बड़ा हिस्सा ऑफिस में बिताते हैं, जिससे सहकर्मियों के बीच घनिष्ठता बढ़ती है।
  2. भावनात्मक सहारा: करियर प्रेशर और जीवन की जटिलताओं में सहकर्मियों से भावनात्मक जुड़ाव होना आम होता जा रहा है।
  3. वर्क फ्रॉम होम के बाद बदलाव: कोविड के बाद दोबारा ऑफिस लौटने पर लोगों के व्यक्तिगत और पेशेवर रिश्ते तेजी से बदले हैं।
"जब लोग एक ही मिशन, समयसीमा और तनाव में होते हैं, तो भावनात्मक कनेक्शन होना स्वाभाविक है।"
— एक कॉर्पोरेट साइकोलॉजिस्ट

इसका असर क्या हो रहा है?

ऑफिस अफेयर्स का असर सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं रहता। इसके कई सकारात्मक और नकारात्मक पहलू होते हैं:

  • सकारात्मक: कुछ मामलों में बेहतर टीमवर्क और समझ देखने को मिलती है।
  • नकारात्मक: ब्रेकअप के बाद वर्क एनवायरनमेंट में तनाव, जलन और शिकायतें आम हो जाती हैं।
  • कई कंपनियां अब "नो रोमांस पॉलिसी" लागू कर रही हैं या रिश्तों की घोषणा को अनिवार्य बना रही हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

मानव संसाधन विशेषज्ञों का मानना है कि ऑफिस अफेयर्स को छुपाने की बजाय, पारदर्शिता और प्रोफेशनलिज़्म अपनाना ज़रूरी है।

"रिश्ते गलत नहीं हैं, लेकिन उन्हें छुपाकर रखने से ऑफिस कल्चर प्रभावित हो सकता है।"
— एचआर कंसल्टेंट, दिल्ली

निष्कर्ष

भारत में बदलते सामाजिक ढांचे और कार्यस्थल की संस्कृति ने ऑफिस अफेयर्स को नया रूप दिया है। यह ट्रेंड अब छुपा नहीं है, बल्कि कई कंपनियाँ इसे समझदारी से मैनेज करने की कोशिश कर रही हैं।

आपका क्या मत है? क्या ऑफिस अफेयर्स नैतिक रूप से स्वीकार्य हैं, या इन्हें प्रोफेशनलिज़्म के खिलाफ माना जाना चाहिए?

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