नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रारंभिक व्यापार समझौते की ज्यादातर बातें तय हो चुकी हैं, लेकिन अब अंतिम फैसला राजनीतिक नेतृत्व को लेना है।
दो बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है:
1. भारत चाहता है कि अमेरिका सभी दंडात्मक टैक्स (टैरिफ) पूरी तरह हटा दे।
2. अमेरिका चाहता है कि भारत अपने कृषि क्षेत्र को ज्यादा खुले रूप में अमेरिका के लिए खोले।
भारत को चिंता है कि अमेरिका का वाणिज्यिक डेयरी और GMO (जेनेटिकली मॉडिफाइड) उत्पाद छोटे भारतीय किसानों और धार्मिक भावनाओं पर असर डाल सकते हैं।
भारत ने अमेरिका की UK जैसी डील की पेशकश ठुकरा दी है। अमेरिका चाहता है कि भारत कुछ कृषि उत्पादों के लिए रियायती टैक्स के कोटे (TRQ) दे, लेकिन भारत डेयरी, गेहूं और चावल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में रियायत देने को तैयार नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देश एक-दूसरे की राजनीतिक और व्यावहारिक संवेदनशीलताओं का सम्मान करें, तो 9 जुलाई से पहले एक सीमित व्यापार समझौता हो सकता है।
समझौते में अमेरिका को बादाम, सेब, अंगूर, शराब जैसे उत्पादों में सीमित छूट मिल सकती है, लेकिन डेयरी और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भारत कोई रियायत नहीं देगा।
अब फैसला नेताओं को लेना है।
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