नई दिल्ली: बिहार में आज से वोटर लिस्ट की विशेष जांच शुरू हो गई है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि यह नई वोटर लिस्ट नहीं बनाई जा रही, बल्कि पुरानी सूची की जांच और सुधार हो रही है।
अब लोग बिना दस्तावेज के भी फॉर्म भर सकते हैं, और उनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जुड़ जाएगा। दस्तावेजों की जांच बाद में होगी।
मुख्य बातें:
78,000 बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर फॉर्म भरवाएंगे।
जिनके पास जन्म प्रमाणपत्र नहीं हैं, वे जमीन के कागज, रजिस्टर या परिवार प्रमाणपत्र दे सकते हैं।
2003 की वोटर लिस्ट में जिनके नाम थे, वे उसका स्क्रीनशॉट देकर फॉर्म भर सकते हैं।
जो लोग बाहर काम करते हैं, उनके परिवार वाले भी फॉर्म भर सकते हैं।
संकट और आलोचना:
विपक्ष ने इसे NRC जैसा बताया और कहा कि यह लाखों लोगों को वोट से वंचित कर सकता है।
BLOs को समय, मौसम और संसाधनों की कमी से काम में दिक्कत हो रही है।
गरीब और भूमिहीन लोगों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं।
चुनाव आयोग का जवाब:
संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत वोटिंग सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही मिलती है।
2003 की लिस्ट को नागरिकता का सबूत माना जाएगा जब तक कोई विरोध नहीं आता।
BLO को संदेह होने पर मामला ऊपर के अफसर को भेजना होगा।
यह प्रक्रिया बिहार के बाद देश के 5 और राज्यों में होगी।
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